CITIZEN NEWS पटना ए.एन. कॉलेज में राष्ट्रीय युवा दिवस की पूर्व संध्या पर उमड़ा ‘काव्य कुंभ’

Patna डॉ. हरिओम पंवार और शंभू शिखर ने जीता पटना का दिल कवि सम्मेलन से उठा राष्ट्रकवि दिनकर को भारत रत्न देने का स्वर

पटना : राष्ट्रीय युवा दिवस की पूर्व संध्या पर राजधानी के प्रतिष्ठित ए.एन. कॉलेज बोरिंग रोड के सभागार में दिव्य दिनकर संस्था द्वारा एक विराट एवं भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रबोध और युवा चेतना का सशक्त संगम बनकर उभरा। कार्यक्रम में साहित्य, चिकित्सा और पत्रकारिता जगत की विशिष्ट विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस पूरे आयोजन की परिकल्पना, संयोजन और सफल क्रियान्वयन में दिव्य दिनकर संस्था के संस्थापक एवं प्रमुख आयोजक श्री सतीश कुमार शर्मा की केंद्रीय भूमिका रही। उनकी साहित्यिक दृष्टि, संगठन क्षमता और राष्ट्रकवि दिनकर के प्रति समर्पण के कारण यह आयोजन एक यादगार सांस्कृतिक पर्व के रूप में स्थापित हुआ।

इस अवसर पर चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रख्यात फिजिशियन डॉ. राजीव रंजन, न्यूरोसर्जन डॉ. राजीव रंजन, यूरोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्व कुमार चौधरी, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मी सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों को दिव्य दिनकर संस्था द्वारा सम्मानित किया गया।


इसके साथ ही शहर के वरिष्ठ एवं गणमान्य पत्रकारों को भी सम्मान प्रदान कर समाज में उनकी भूमिका को रेखांकित किया गया।
आयोजन के सूत्रधार : सतीश कुमार शर्मा
इस विराट राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के मुख्य सूत्रधार, परिकल्पनाकार एवं आयोजक दिव्य दिनकर संस्था के संस्थापक सतीश कुमार शर्मा रहे। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने, युवाओं को साहित्य और राष्ट्रबोध से जोड़ने तथा नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने की उनकी सतत पहल के कारण यह आयोजन ऐतिहासिक और स्मरणीय बन सका। साहित्यिक प्रतिबद्धता, संगठन क्षमता और सांस्कृतिक दृष्टि के कारण शर्मा का योगदान कार्यक्रम की सफलता का केंद्रीय आधार रहा।
काव्य जगत के दिग्गजों ने बांधा समां कवि सम्मेलन में देश के ख्यातिप्राप्त कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से सभागार को ऊर्जा, ओज और उल्लास से भर दिया।
वीर रस के शिरोमणि डॉ. हरिओम पंवार ने अपनी ओजस्वी कविताओं से राष्ट्रभक्ति का संचार करते हुए युवाओं को राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का स्मरण कराया।
हास्य-व्यंग्य के लोकप्रिय कवि शंभू शिखर ने अपने तीखे व्यंग्य और चुटीले अंदाज़ से पूरे सभागार को ठहाकों से गूंजा दिया।
प्रसिद्ध युवा गीतकार स्वयं श्रीवास्तव ने संगीत और कविता के मधुर समन्वय से श्रोताओं को भावविभोर किया।
प्रबुद्ध सौरभ एवं जसवीर सिंह हलदर ने समसामयिक विषयों और सामाजिक सरोकारों पर आधारित रचनाएँ प्रस्तुत कीं, जबकि श्रद्धा शौर्य ने अपनी सशक्त आवाज़ और संवेदनशील काव्य पंक्तियों से नारी शक्ति और युवा भावनाओं को स्वर दिया।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि दो युवा प्रतिभाओं की खोज इस विराट आयोजन की सबसे बड़ी और दूरगामी उपलब्धि यह रही कि दिव्य दिनकर संस्था के मंच से दो नवोदित युवा काव्य प्रतिभाओं की खोज हुई। इन युवाओं ने अपनी आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति और साहित्यिक परिपक्वता से यह सिद्ध कर दिया कि हिंदी काव्य परंपरा सुरक्षित और सशक्त हाथों में है। युवाओं को मंच और मार्गदर्शन देकर उन्हें आगे बढ़ाने की यह पहल संस्था को एक दूरदर्शी साहित्यिक आंदोलन के रूप में स्थापित करती है।
दिव्य दिनकर संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि स्वामी विवेकानंद की जयंती (राष्ट्रीय युवा दिवस) की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक विरासत, हिंदी साहित्य और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के विचारों से जोड़ना है। हास्य, व्यंग्य, वीर रस और संगीत के इस समन्वय ने युवाओं को नई वैचारिक प्रेरणा दी।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भारत रत्न का नैतिक और राष्ट्रीय दायित्व कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं और कवियों ने एक स्वर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि दिनकर केवल कवि नहीं, बल्कि भारत की चेतना, स्वाभिमान और संघर्षशील आत्मा की मुखर अभिव्यक्ति हैं।
उनकी कविताएँ स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन रहीं।
“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” जैसी पंक्तियाँ लोकतंत्र की उद्घोषणा हैं।
दिनकर का साहित्य युवाओं को कर्तव्य, शौर्य, त्याग और नैतिक संघर्ष का पाठ पढ़ाता है। रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र और परशुराम की प्रतीक्षा जैसे ग्रंथ आज भी राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा देते हैं। उनकी अमर कृति ‘संस्कृति के चार अध्याय’ भारतीय सभ्यता की आत्मकथा मानी जाती है।
राज्यसभा सदस्य के रूप में भी दिनकर ने शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विषयों पर संसद में सशक्त विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि ज्ञानपीठ और पद्म भूषण जैसे सम्मान उनके विराट योगदान के सामने अपर्याप्त हैं।कार्यक्रम में सर्वसम्मति से यह मत व्यक्त किया गया कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को भारत रत्न देना किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि राष्ट्र का नैतिक और ऐतिहासिक दायित्व है। अब समय आ गया है कि भारत अपने राष्ट्रकवि के प्रति अपना ऋण स्वीकार करे।

 

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