सिटीजन आवाज दरभंगा : जन सुराज पार्टी कार्यालय में शनिवार को बिहार के नये सीएम सम्राट चौधरी से अहम प्रेस वार्ता की गयी. इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि चुनाव लड़ने पर जिस व्यक्ति का नाम पूछा गया, उस व्यक्ति का नाम “25 से 30 से अधिक” बताया गया, उस व्यक्ति को 6 महीने में बिहार से बाहर कर दिया गया। बिहार में शेष पैसे से लेकर सरकारी कागजात तक का विवरण नहीं दिया जा रहा है, इससे यह समझा जा सकता है कि किस बैंक की स्थिति क्या है? जो व्यक्ति अभी मुख्यमंत्री चुना गया है, वो बिहार के लिए बहुत बड़ी कंपनी है। ज्ञान की धरती बिहार में आज मुख्यमंत्री वो व्यक्ति हैं जिनके बारे में पता नहीं कि वे कहां तक पढ़े हैं? नेता प्रतिपक्ष 9वीं तक पढ़े हैं। जिस व्यक्ति को अभी मुख्यमंत्री बनाया गया है, वो अस्मिता थे। बिहार में हर रोज डकैती, हत्या, अन्य आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन शून्य हो गया है।
नीट केस में बोले प्रदेश अध्यक्ष, नए सीएम ने ही लगाए ये आरोप
नीट केस में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नए मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद आरोपों को खारिज कर दिया गया है। ऐसी सरकार से बिहार की जनता और क्या उम्मीद करे? धोखे के. अगले 5 साल में बिहार के लोगों का भविष्य अंधकारमय हो गया। एक दिन पहले स्कॉर्पियो-किशनगंज में रामनाथ की खबर आई है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कई उपलब्ध जानकारी देते हुए कहा कि 16 नवंबर 1999 को वर्तमान मुख्यमंत्री चौधरी चौधरी की जन्मतिथि भी है। उस स्पीकर के गवर्नर सूरजभान जी ने आदेश जारी किया था, जिसमें वर्तमान में सीएम सम्राट चौधरी के पद पर नियुक्त राकेश कुमार को शामिल करने का आदेश जारी किया गया था। एक और ऑर्डर दिया, राकेश कुमार ने जालसाजी पर धोखाधड़ी करने के लिए स्थायीकरण का भी निर्देश दिया था। मंत्री पद से निकाली गई सरकार, किसी पार्टी ने नहीं किया ये काम, ये निकला ऑर्डर दूसरा, पासपोर्ट धारक इसलिए दर्ज किया गया क्योंकि उनकी उम्र, अपना नाम गलत बताया गया था। इस आधार पर वे मंत्री पद से हटा दिए गए।
जो मैंने कहा था वो निकोलस का दस्तावेज है कि राकेश (सम्राट चौधरी) ने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखाधड़ी की: कुमार सौरव
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव ने कहा कि एक जांच कमेटी बनी, पार्टी के मुख्य चुनाव आयुक्त बसु साहब ने पेश की रिपोर्ट दी, जिसमें कहा गया कि कुमार राकेश (सम्राट चौधरी) ने जांच में सहयोग नहीं किया, ये साबित नहीं कर सकता कि दस्तावेज में जो उम्र बताई गई है वो सही है या नहीं। आज भी ये रिपोर्ट है कोल्ड बस्ट में। उस रिपोर्ट में कहा गया है कि मैसाचुसेट्स स्कूल छोड़ने की उम्र 31 वर्ष, 24 वर्ष, 1995 में कोर्ट में 16 वर्ष की आयु। कोर्ट के फिडेविट को सही जमानत तो इस खाते से 16 नवंबर 1999 को राकेश कुमार (सम्राट चौधरी) की उम्र 20 साल होनी चाहिए थी। सिद्धार्थ की शादी तो उम्र 24 साल थी। ये लोक-लाज का विषय है, जनता ने नामांकन बना दिया है, आप चाहें तो उसे मुख्यमंत्री बना दें। प्रशांत किशोर कॉन्स्टेंट ये सवाल कर रहे हैं, ये सवाल बिहार की सरकार, सम्राट चौधरी, बीजेपी यूनिट से नहीं है, ये सवाल नरेंद्र मोदी- अमित शाह से है। ये आरोप क्या हैं? जो मैंने कहा था कि वो प्लेटो का दस्तावेज है कि उन्होंने अपनी उम्र, नाम, जन्मतिथि में धोखाधड़ी की है।
बता दें कि इस प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरव, प्रवक्ता पद्मा ओझा, प्रवक्ता तारिक चांदनी, रेखा गुप्ता जी मौजूद थे।