CITIZEN AWAZ : हिन्दी पत्रकारिता दिवस’ पर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग द्वारा संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित

‘समाज, राष्ट्र और साहित्य के उन्नयन में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका’ विषय पर अतिथियों एवं वक्ताओं में रखें विचार

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के तत्वावधान में “समाज, राष्ट्र और साहित्य के उन्नयन में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन विभागाध्यक्ष प्रो उमेश कुमार की अध्यक्षता किया गया। इस अवसर पर हिन्दी के विद्वान एवं विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य प्रो हरि नारायण सिंह का विभाग की ओर से पाग, चादर, मोमेंटो आदि से सम्मान किया गया।


अध्यक्षीय उद्‌बोधन में प्रो उमेश कुमार ने कहा कि आज आज के दिन 30 मई,1826 में ‘उदंड मार्तंड’ के पहली बार बंगाल से हिन्दी भाषा में प्रकाशन के साथ ही हिन्दी पत्रकारिता प्रारंभ हुई थी जो कई उतार-चढ़ाव के बावजूद अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पत्रकारिता समाज की जरूरतों को कई मायनों में पुरा करती है। स्वस्थ एवं स्वच्छ पत्रकारिता राष्ट्र और समाज के विकास के लिए बहुत उपयोगी है जो यथार्थ की धरातल पर कार्य करती है।कहा कि हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र हो उन्हें पत्रकारिता जरुर प्रभावित करती है। पत्रकारिता समाजसेवा है जो मानवता एवं जनहित का बेहतर माध्यम है। अच्छी पत्रकारिता समाज, राष्ट्र और साहित्य के लिए बेहद जरूरी है। अतिथि स्वागत एवं बीज व्यक्तव्य देते हुए प्रो विजय कुमार ने पत्रकारिता की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकारों को सिद्धांतों पर काम करना चाहिए, दिखावा नहीं। इसका क्षेत्र अति विस्तृत है जो जनता में विश्वास जगाती है। प्रो कुमार ने पत्रकारिता को राष्ट्रहित से जोड़ते हुए हिन्दी नवजागरण में महावीर प्रसाद द्विवेदी की पत्रकारिता की भूमिका को बताया।


मुख्य अतिथि प्रो हरिनारायण सिंह ने अपने वक्तव्य में भाषा को पढ़ने और लिखने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करते कहा कि पत्रकारिता का इतिहास काफी लंबा रहा है। सोशल मीडिया के बाद भी पत्रकारिता का महत्व कभी भी कम नहीं होगा। पत्रकारिता में बड़ी शक्ति होती है। इसे जनतंत्र का प्रहरी भी कहा जाता है। वर्तमान एआई के दौर में पढ़ाई और लिखाई से दूर हो रहे युवा को पत्रकारिता एवं किताबों के महत्व को ऐतिहासिक तथ्यों के साथ जोड़कर बताया। उन्होंने अपने 33 वर्षों की पत्रकारिता की चर्चा करते हुए कहा कि पत्रकारिता पैशन, कौशल, कला है, जिसे तलवार के धार पर चलने के समान माना जाता है। वक्ता डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने अपने व्यक्तव्य में पत्रकारिता का महत्व समाज, साहित्य एवं राष्ट्र के निर्माण के लिए अति आवश्यक बताया। इसमें इतनी ताकत है कि यह किसी देश को गुलाम भी बन सकती है तथा आजाद भी करबा सकती है। उन्होंने हिन्दी-उर्दू की साझी पत्रकारिता की चर्चा करते हुए हिन्दू-मुस्लिम की एकता के रूप माना है। कहा कि दुनिया में कुछ भी निरपेक्ष नहीं है, बल्कि सापेक्ष हैं। इसे हमेशा समाज के हित में खड़ा होना चाहिए।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि पत्रकारिता समाज का दर्पण एवं प्रहरी है जो सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि पैशन भी है। यह समाज का आंख एवं कान है जो समाज के गरीबों, पिछड़ों, दलितों एवं हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज है। इसमें करियर की भी काफी संभावना है। कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक मीडिया किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आधारशिला है। यह समाज और सरकार के बीच मजबूत सेतु है। डॉ सियाराम मुखिया ने पत्रकारिता को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर यह स्पष्ट किया कि इसका आम जन को जगाने में काफी भूमिका रही है। कहा कि यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जिसका क्षेत्र अति विस्तृत एवं इतिहास 200 वर्षों का है।

सिटीजन आवाज़ प्रधान संपादक पंकज कुमार झा ने कहा कि जब प्रशासन आम लोगों की नहीं सुनता है तो पत्रकारिता उनकी आवाज बनकर समस्याओं का निदान करवाती है। पत्रकार स्वयं अनुशासन का पालन करते हुए खबरों की सत्यता पहले जांचें तथा सभी पक्षों से जानकारी लेकर ही जनता के बीच रखें। वे न जल्दीबाजी करें, न विवाद करें, न क्रोध करें, न ही अपनी सीमा लांघें। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्र, शोध छात्र एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं में शोधार्थी- जयप्रकाश कुमार, अंशु कुमारी, शिवानी कुमारी, पत्रकारिता के छात्र धीरज सिंह, नीरज कुमार, आशीष अंबर, डॉ धनराज कुमार, प्रिंस कुमार, सचिन कुमार यादव, दीपक कुमार, पंकज कुमार ठाकुर, दर्शन सुधाकर, प्रहलाद कुमार, डॉ लाल कुमार आदि ने विचार रखे। इस अवसर पर हिन्दी विभाग में संचालित पत्रकारिता एवं जनसंपर्क सर्टिफिकेट कोर्स के प्रशिक्षण प्राप्त छात्रों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी जयप्रकाश कुमार ने किया।

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