‘दूर की धुन’ और ‘परफेक्ट होम’ ने जीता दिल, विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना

Delhi: डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय में आयोजित फिल्म परिचर्चा के दौरान विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई दो लघु फिल्में ‘दूर की धुन’ और ‘परफेक्ट होम’ अपने अनूठे कथानक, प्रभावी संदेश और सरल प्रस्तुति के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हरियाणवी गीत व प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक संजीव वेदवान की उपस्थिति में इन दोनों फिल्मों की कहानी और उनके उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसे प्रो. बिजेन्द्र कुमार और प्रो. शशि रानी ने सराहा।

फिल्म ‘दूर की धुन’ का मुख्य उद्देश्य समाज को यह समझाना है कि संवाद स्थापित करने के लिए केवल शब्दों या आवाज की ही आवश्यकता नहीं होती, बल्कि भावनाएं और संवेदनाएं भी संवाद का सशक्त माध्यम बन सकती है। इस फिल्म में एक ऐसे गूंगे-बहरे व्यक्ति की संवेदनशील कहानी को दर्शाया गया है जो बोल नहीं सकता, लेकिन अपनी खामोशी, हाव-भाव और आंतरिक दृढ़ता से समाज के बीच अपनी बात को बेहद प्रभावी तरीके से पहुँचाता है। यह फिल्म यह सिखाती है कि दिव्यांगता कभी भी किसी की अभिव्यक्ति और प्रतिभा के आड़े नहीं आती, बशर्ते सामने वाले का दिल और सोच उसे समझने के लिए तैयार हो।

वहीं दूसरी फिल्म ‘परफेक्ट होम’ एक आदर्श और संतुलित जीवन की परिकल्पना को प्रस्तुत किया। इस फिल्म की कहानी घर और परिवार के उन मूल्यों पर आधारित थी जहां आपसी प्रेम, विश्वास और सामंजस्य से एक सामान्य घर को ‘परफेक्ट होम’ में बदला जा सकता है। इसमें जीवन की छोटी-छोटी खुशियों और पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट को बहुत ही सहज और सरल भाषा में पिरोया गया। इन दोनों ही फिल्मों के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल अपनी रचनात्मक कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि समाज को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश भी दिया। निर्देशक संजीव वेदवान ने विद्यार्थियों के इन प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियों से अवगत कराया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रेम कुमार ने किया।

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