दरभंगा : शुक्रवार को पटना के बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के ऐतिहासिक और भव्य सभागार में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में सम्मेलन द्वारा डॉ रत्नेश्वर सिंह के सर्जना साहित्य पर केन्द्रित प्रकाशित अभिनंदन ग्रंथ “सर्जना के स्वर रत्नेश्वर “ और दरभंगा के प्रसिद्ध गीतकार और कवि डॉ अमरकान्त कुमर के सद्यःप्रकाशित तीसरे गीत संग्रह “कस्तूररी गंध लिए “ का भरपूर स्वागत के साथ विमोचन हुआ । पटना के जाने माने कवि और चौथी वार भी ~निर्विरोध~ चुने गए बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ की अध्यक्षता में आयोजित इस विमोचन समारोह में पटना के जाने माने कवि , गीतकार ग़ज़ल गो उपस्थित रहे। हिंदी प्रेमियों , रचनाकारों से भरे विशाल हॉल में अनेक , रचनाकार उपस्थित थे ।
मंचस्थ अतिथियों में , साहित्यकारों में प्रमुख थे देश के नामी नवगीतकार , प्रखर वक्ता , विद्वान् , हिन्दी भोजपुरी के रचनाकार भगवती प्रसाद द्विवेदी, पूर्व आईएएस और साहित्यकार शशिभूषण सिंह शशि , प्रसिद्ध साहित्यकार रत्नेश्वर सिंह, डॉ अमरकान्त कुमर ,पटना दूरदर्शन के पूर्व कार्यक्रम प्रमुख और संगीतकार गायक राज कुमार नाहर, वर्तमान कार्यक्रम प्रमुख दूरदर्शन, पटना डॉ मनोज प्रभाकर, ग्वालियर से पधारीं प्रसिद्ध समाजसेविका कवयित्री और सामाजिक दर्पण सोसलमिरर फ़ाउंडेशन की संस्थापिका शकुंतला तोमर , प्रसिद्ध कवि गीतकार ब्रह्मानंद पांडेय , अनुपम जी । सम्मुखस्थ सभा में उपस्थित थे युवाकवि और साहित्य यात्रा शोध पत्रिका के उपसंपादक प्रो अमित कुमार मिश्रा, कवयित्री और साहित्य यात्रा शोधपत्रिका की उपसंपादिका डॉ करुणा कमल पीटर , प्रसिद्ध समीक्षक और आज़ाद ग़ज़लकार सिध्देश्वर , अमीना ख़ातून , सूर्य प्रकाश उपाध्याय, विद्यापति चौधरी , मधुरानी , और प्रसिद्ध शायर एहसान शाम समेत अनेक रचनाकार उपस्थित थे ।अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए बिहार हिन्ही साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और सभाध्यक्ष कविवर अनिल सुलभ ने कहा कि हरेक पुस्तक का प्रकाशन हिन्दी के विशाल भंडार को और अधिक समृध्द करता है और ज्ञान परंपरा को मजबूती देता है ।

