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Citizen Awaz Darbhanga : बैसाखी उत्सव आर्य समाज, करोल बाग में हर्षोल्लास एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न

Citizen Awaz Darbhanga  : आर्य समाज, करोल बाग में बैसाखी उत्सव अत्यंत हर्ष, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम ने भारतीय संस्कृति, परंपरा, राष्ट्रभावना और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्य समाज, करोल बाग के प्रधान श्री कीर्ति शर्मा ने की। मंच संचालन श्रीमती दीप्ति टंडन ने प्रभावशाली एवं सुसंयमित ढंग से किया।

इस अवसर पर श्री वागीश इस्सर ने अपने प्रेरक उद्बोधन में बैसाखी के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बैसाखी केवल फसल कटाई का पर्व नहीं, बल्कि उत्साह, परिश्रम, समृद्धि और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री कीर्ति शर्मा ने बैसाखी के ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सन 1699 में बैसाखी के पावन अवसर पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की, जिसने भारतीय समाज में साहस, धर्मरक्षा, आत्मसम्मान और संगठन की अद्भुत चेतना का संचार किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 13 अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास में अत्यंत वेदनापूर्ण स्मृति से भी जुड़ा है, क्योंकि इसी दिन ब्रिटिश शासन द्वारा जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसा अमानवीय नरसंहार किया गया था। उन्होंने कहा कि बैसाखी हमें एक ओर आध्यात्मिक प्रेरणा, वीरता और संगठन का संदेश देती है, तो दूसरी ओर राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले अमर शहीदों का स्मरण कराती है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव को विशेष आकर्षण प्रदान किया। श्री दिनेश पाथिक, तनिष्क एवं अद्विता द्वारा प्रस्तुत भजन, बैसाखी गीत एवं पंजाबी गीतों ने वातावरण को भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना दिया। उपस्थित जनसमूह ने इन प्रस्तुतियों की भरपूर सराहना की।
कार्यक्रम में भजन एवं गीतों के साथ-साथ मनमोहक गिद्दा और भांगड़ा की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। पूरे परिसर में उत्सव, उमंग और पारंपरिक रंगों की छटा बिखर गई।
अंत में श्री कमल आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, कलाकारों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर शशि मल्होत्रा, मंजू शर्मा, निरुपमा पुरी, आदर्श आहूजा, रमेश बेदी एवं ज्ञान मेदीरत्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
बैसाखी उत्सव का यह आयोजन सभी उपस्थितजनों के लिए अत्यंत स्मरणीय रहा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना तथा सामाजिक समरसता को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करने वाला सिद्ध हुआ।

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