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नारी सशक्तिकरण के लिए अनुपम यात्रा का स्वागत

दरभंगा : नारी में चेतना जागृति के लिए स्थापित सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘अनुपम मुहिमक अनुपम डेग’ के तत्वाधान में नारी सशक्तिकरण के लिए प्रदेश की राजधानी पटना से मिथिला की एक दिवसीय यात्रा पर निकली ‘वैदेही जत्था’ के शनिवार को दरभंगा पहुंचने पर श्यामा मंदिर परिसर में भव्य स्वागत किया गया। विद्यापति सेवा संस्थान एवं मां श्यामा न्यास समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित स्वागत कार्यक्रम में संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू, मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा, न्यास के उपाध्यक्ष पं कमलाकांत झा एवं सदस्य मधुबाला सिन्हा के द्वारा यात्रा में शामिल महिलाओं का फूलों की माला एवं मां श्यामा की चुनरी और प्रसाद प्रदान कर सम्मानित किया गया।

मौके पर यात्री दल की अगुआई कर रही समाजसेविका अनुपम झा ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य मिथिला की नारी शक्ति को जागृत करते हुए उन्हें यह अहसास कराना है कि वे अब अबला नहीं रहीं, बल्कि वे अब सबला बनकर स्वयं आयोजक की भूमिका में आ गयी हैं। बदलते दौर के साथ वे अब खुद की कमान संभलना सीख गयी है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं किसी आयोजन में दर्शक दीर्घा में बैठकर सिर्फ दर्शक की हिस्सा बनती थी और मंचासीन पुरुष वर्ग के क्रिया-कलाप को बस देखने भर के लिए मजबूर होती थी, लेकिन अब स्थिति साफ उलट हो गई है। हमारी यह यात्रा आज दिखा रही है कि हम अब सिर्फ किसी बंद कमरे में हो रहे आयोजन का हिस्सा भर नहीं हैं, बल्कि हम किसी भी प्रकार की बाहरी यात्रा का भी आयोजन कर नारी शक्ति को जागरूक कर सकती हैं।
विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने अपने संबोधन में कहा कि नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में मिथिला सदियों से अव्वल रहा है। जानकी, भामती, भारती, गार्गी और मैत्रेयी सरीखी विदुषी इसके सशक्त उदाहरण हैं। उन्होंने यात्रा में शामिल नारियों को सलाह दी कि वे कभी भी अपनी पहचान, अपना चरित्र व अपनी निष्ठा को खोने न दें। पं कमलाकांत झा ने नारी समाज को गूढ़ मंत्र दिया कि कभी अपने आपको उस बगीचे की तरह न संवारें कि वहां हर कोई टहल सके, बल्कि इसे खुले विस्तृत आकाश की तरह संवारें जहाँ हर किसी का पहुंच पाना असंभव हो।
मधुबाला सिन्हा ने अपने संबोधन में नारी की तुलना बोनसाई के वृक्षों से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह बोनसाई के जड़ों व शाखाओं को बार-बार काट-छांट कर बढ़ने और फैलने से रोका जाता है, ठीक उसी तरह हमारा समाज नारी के ऊपर पाबंदी लगाकर उसे बढ़ने और फैलने से रोकता है। हमें इस जड़ मानसिकता से ऊपर उठ कर समानता के साथ नारी समाज को भी आगे लाना होगा।
प्रवीण कुमार झा ने संघर्षो से जूझ कर अपनी पहचान कायम करने वाली महिला शख्सियतों की चर्चा करते हुए नारी समाज से अपना विकास स्वयं करने के लिए उन सबके नीति-आदर्शो का अनुकरण करने की सलाह दी। चेतना समिति की अध्यक्ष निशा मदन झा ने अपने पद्यमय संबोधन में कहा ‘नारी नहि कमजोर कतहु अछि, सगरो अछि बलशाली। परिचय हुनक कखनो सिया, कखनो अछि लक्ष्मीबाई।’ भाजपा नेत्री मीना झा ने आह्वान किया कि नारी शक्ति अपने अंदर निहित शक्ति को बाहर लाएं और उसका सकारात्मक उपयोग करके दुनिया को दिखाएं कि हम सचमुच सशक्त हैं।
मौके पर चेतना समिति के पूर्व अध्यक्ष विवेकानंद झा, विवेकानंद ठाकुर एवं नवीन सिन्हा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में महिलाओं ने डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू एवं पं कमलाकांत झा को यात्रा स्मृति प्रतीक प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदीप झा, कुमार अनुराग, दीपक झा, आशीष चौधरी, पुरुषोत्तम वत्स, लालू वत्स, पंकज कुमार आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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