दरभंगा में सीएमआर केंद्रों द्वारा सड़ा गला अनाज वितरण का बड़ा मामला !
दरभंगा : केंन्द्र सरकार कि महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जिसके तहत गरीबों को मुफ़्त में अनाज डीलरों के माध्यम से वितरण किया जा रहा है। दरभंगा जिलें के विभिन्न गोदामों से गुणवत्ताहीन चावल डीलरों को देने का मामला आया है । दरभंगा जिला अंतर्गत कई लाभुकों से मिली सूचना के अनुसार उन्हें फोर्टिफाइड चावल के जगह सड़ा गला एवं पिल्लू युक्त चावल मुहैया करवाया जा रहा है। पूरा मामला बिठौली सीएमआर अधिप्राप्ति गोदाम से जुड़ा हुँआ है जहां सहायक प्रबंधक के द्वारा गुणवत्ताहीन चावल संग्रहीत किया गया। गोदामों से डीएसडी के माध्यम से डीलरों को और कार्ड धारकों को दिया जा रहा है। प्राप्त सूचना के अनुसार चावल सड़ा गला कीड़ा पीलू युक्त वितरण किया जा रहा है। जिला स्तरीय सीएमआर गोदामों कि जांच हुई तो हो सकता है बड़ा ख़ुलासा। सूत्रों के अनुसार इस पूरे रैकेट में बिठौली सीएमआर केंन्द्र के लिए प्रतिनियुक्त क्वालिटी कॉन्ट्रोलर एवं भारतीय खाद निगम सें नामित अधिकारी, इन सभी के संयुक्त गोलबंदी से पूरा खेल होता है। जिलें सें नामित एडीएम (पिजिआरओ) सह वरीय सीएमआर प्रभारी को गलत सूचना जांच रिपोर्ट कर करोड़ों का अवैध उगाही की गई है ।
दरभंगा जिला अंतर्गत सभी राशन कार्डधारी को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत फोर्टिफाइड चावल के जगह सड़ा गला एवं पिल्लू युक्त चावल जन वितरण दुकानों के द्वारा मुहैया करवाया जा रहा है।
राज्य खाद्य निगम की सूत्र की माने तो इस पूरे गुणवत्ता हिन चावल वितरण के खेल में जिला के दो सहायक प्रबंधक शामिल है। इनके द्वारा पेक्सो सें लोकल अधिप्राप्ति के नाम पर प्रति लॉट 18,000-22000 रुपये तक कि वसूली कि गई है। विदित हो एक लॉट का अभिप्राय 293 क्विंटल होता है। मार्केट में विचलित / कालाबाजारी का एक चेन प्रशासन के नाक के नीचे संचालित होता है। इसके अंतर्गत जन वितरण दुकानदारों द्वारा लाभुकों को मुहैया किया गया चावल हर गाँव में शहर के वार्ड में ठेला / रिक्शा / मोटरसाईकल / के माध्यम सें सें विभिन्न कस्बों में एक अवैध रूप सें संचालित वेंडरों को मुहैया करवाया जाता है। जिसका सिधा कनेक्शन जिला सहकारिता विभाग सें टैग मील संचालकों सें रहता है। जिसे मील संचालक द्वारा विभागीय बोरा पर अपना री पेकिंग कर पुनः राज्य खाद निगम के जिला के विभन्न सीएमआर केंन्द्र पर स्पलाई कर दि जाती है। पैक्सों से धान के बदले पैसा लेकर मिलरों द्वारा चावल ख़रीद कर सीधे विभाग के सीएमआर केंन्द्र भेज दिया जाता है। धान अधिप्राप्ति और सीएमआर के नाम पर वर्षों से पदाधिकारियों के साठगांठ से खेल खेला जा रहा है। जांच हुई तो कई अधिकारी भ्रस्टाचार में लिप्त पकड़े जाएंगे।

