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Darbhanga डीएमसीएच में प्रचलन नवजात की मुंह दिखाई नाम पर एक से पांच हजार की होती उगाही !

DMCH महीनों से पोस्टेड कर्मियों का जल्द ही दूसरे विभागों में ट्रांसफर किया जाएगा। साथ ही एमसीएच लेबर रूम कर्मियों के नियमित तबादले की रणनीति बनाई जा रही है : डॉ. अमित कुमार, उपाधीक्षक, डीएमसीएच

अफजल खान की रिपोर्ट…

दरभंगा : डीएमसीएच के एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल) में प्रसूतियां और उनके स्वजन शिशु जन्म के बाद ‘मुंह दिखाई’ की रस्म के नाम पर हो रही अवैध वसूली से परेशान हैं। आरोप है कि लेबर रूम में तैनात दाइयां नवजात को दिखाने के बदले एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की मांग करती हैं। पैसा देने में असमर्थ स्वजनों को गालियां तक सुननी पड़ती हैं, जबकि प्रसूता अपने नवजात को देखने के लिए तड़पती रहती है।बताया जाता है कि लंबी बहस और मिन्नतों के बाद जब स्वजन तय रकम चुकाते हैं, तब जाकर मां को नवजात का चेहरा देखने दिया जाता है। एमसीएच में यह स्थिति लगभग रोज देखने को मिलती है।रविवार सुबह करीब चार बजे प्रसव के बाद खराजपुर की नेहा कुमारी के स्वजनों ने बताया कि 1500 रुपये देने के बाद ही उन्हें नवजात को देखने दिया गया। वहीं शनिवार रात शहर के भीगो मोहल्ले की पूजा देवी, जाले की दीघा कुमारी और निर्मल देवी के परिजनों ने भी दाइयों द्वारा 1000 से 2000 रुपये तक वसूले जाने का आरोप लगाया। स्वजन रूपा देवी, लक्ष्मण साव और मोहन कुमार ने बताया कि बच्चे के जन्म की खुशी में लोग स्वेच्छा से 100 से 500 रुपये तक दे देते हैं, लेकिन यहां दाइयां दो से पांच हजार रुपये तक की मांग करती हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।बालक और बालिका का रेट फिक्स, वसूली से हो रही मोटी कमाई। एमसीएच में ‘मुंह दिखाई’ और मलहम-पट्टी बदलने के नाम पर 50 से 100 रुपये तक वसूली की पुष्टि उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार की औचक जांच में भी हो चुकी है। जांच के बाद उन्होंने एमसीएच कर्मियों को फटकार लगाई थी, लेकिन इसके बावजूद अवैध वसूली का खेल जारी है।सूत्रों के अनुसार, प्रसव के बाद ‘मुंह दिखाई’ के लिए बाकायदा रेट तय हैं। पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के परिवार से उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार अधिक रकम मांगी जाती है। वहीं बालक के जन्म पर दो से पांच हजार रुपये और बालिका के जन्म पर एक से दो हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। जानकारी के मुताबिक एमसीएच में हर महीने करीब 500 से 600 प्रसव होते हैं। ऐसे में इस अवैध वसूली से प्रतिमाह 10 से 30 लाख रुपये तक की कमाई होने की चर्चा है।

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