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KSDSU संस्कृत यूनिवर्सिटी 15 एकड़ में प्रस्तावित स्टेडियम का निर्माण कब हगा ?

राष्ट्रीय खेल दिवस पर संस्कृत विश्वविद्यालय में खेल गतिविधियों को लेकर उठे सवाल, 15 एकड़ प्रस्तावित स्टेडियम के निर्माण की भी उठी मांग

दरभंगा, 30 अगस्त 2026। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि देते हुए शिक्षा एवं संस्कृत क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

इस अवसर पर कहा गया कि राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलों के महत्व को रेखांकित करने का अवसर है। संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी खेल प्रतिभा रखते हैं और उन्हें अन्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों की तरह नियमित खेल गतिविधियों, प्रतियोगिताओं तथा पर्याप्त खेल सुविधाओं का अवसर मिलना चाहिए।

राज्यपाल सचिवालय के पत्रांक 198/ACS-GS, दिनांक 25 अगस्त 2026 के माध्यम से विश्वविद्यालयों में व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाने तथा इसकी रिपोर्टिंग किए जाने का निर्देश दिए जाने का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय में उक्त निर्देश के अनुपालन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

प्रश्न उठाया गया है कि क्या संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया? यदि आयोजन हुआ, तो उसमें विद्यार्थियों की कितनी भागीदारी रही और उसकी रिपोर्टिंग की गई अथवा नहीं?

15 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित स्टेडियम का मामला भी चर्चा में

इसके साथ ही दीवानी तकिया स्थित लगभग 15 एकड़ भूमि पर करीब 6.34 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित आउटडोर स्टेडियम के निर्माण की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं।

कहा गया कि वर्षों से प्रस्तावित इस खेल परियोजना को लेकर विद्यार्थियों और खेलप्रेमियों में यह जानने की अपेक्षा है कि डीपीआर और शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य किस चरण में है तथा विद्यार्थियों को वास्तविक खेल सुविधा कब तक उपलब्ध हो सकेगी।

यदि भूमि, अतिक्रमण, आधारभूत संरचना अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से परियोजना में विलंब हो रहा है, तो संबंधित स्तर पर उसका समाधान कर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

“संस्कृत विद्यार्थी भी बन सकते हैं खिलाड़ी”

इस अवसर पर कहा गया कि संस्कृत विश्वविद्यालय की पहचान केवल शास्त्र और ज्ञान की परंपरा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों का शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास शिक्षा का अभिन्न हिस्सा है।

संस्कृत का प्रसिद्ध वचन “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्” स्वस्थ शरीर के महत्व को रेखांकित करता है। ऐसे में विश्वविद्यालय में नियमित खेल गतिविधियों, शारीरिक शिक्षा और खेल अधोसंरचना को मजबूत किया जाना विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण कदम होगा।

कुलाधिपति सचिवालय एवं राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि राष्ट्रीय खेल दिवस से जुड़े निर्देशों के अनुपालन तथा प्रस्तावित स्टेडियम की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर विद्यार्थियों के हित में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

साथ ही यह मांग की गई कि विश्वविद्यालय में नियमित खेल गतिविधियों का वार्षिक कैलेंडर तैयार हो, विद्यार्थियों को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर मिलें तथा प्रस्तावित खेल परिसर को शीघ्र विकसित किया जाए।

अंत में स्पष्ट किया गया कि इन प्रश्नों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की भावना अथवा प्रतिष्ठा को आहत करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के हित में व्यवस्था से जुड़े आवश्यक प्रश्न उठाना है। यदि किसी अभिव्यक्ति से किसी की भावना आहत होती है तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, प्रतिभा और भविष्य से जुड़े विषयों पर प्रश्न उठाना एक जागरूक नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य समझा जाता है।

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