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KSDSU: बहुविषयक होगा संस्कृत विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम : कुलपति

स्वागत भाषण में मान्य सदस्यों से मांगा सहयोग, दिया विकास का भरोसाकक

दरभंगा : संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को आयोजित सीनेट की बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुलाधिपति राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर , राजभवन से आये पदाधिकारियों, पूर्व कुलपतियों, बिहार विधान मंडल के मा0 सदस्यों, संकायाध्यक्षों, प्रधानाचार्यों,विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालय के विद्वान शिक्षकों,कर्मचारियों, पदाधिकारियों एवम पत्रकार बन्धुओं का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो0 लक्ष्मी निवास पांडेय ने संस्कृत के विकास व सम्वर्धन के लिए सभी से सहयोग मांगा और साथ ही भविष्य की पुष्ट कार्य योजना के बल पर विश्वविद्यालय को नई बुलन्दियों के शिखर पर ले जाने का भरोसा भी दिया। विकास के नए रोडमैप का खाका खींचते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में इस विश्वविद्यालय में भी बहुविषयक पाठ्यक्रमों को लागू किया जाएगा। साथ ही, संगणक शिक्षा, योग, क्रीड़ा, प्रशासन, लेखा, परीक्षा समेत अन्य कार्यो में अद्यतन परिवर्धन प्रणालियों को भी अपनाया जाएगा। इतना ही नहीं, समाज मे विस्तार कार्यक्रम के रूप मे संस्कृत व संस्कृति का प्रसार करते हुए सभी के समक्ष अपना अस्तित्व, सार्थकता व गुणवत्ता को भी प्रतिष्ठापित करना है।

उक्त जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत ने बताया कि कुलपति प्रो0 पांडेय ने विश्वविद्यालय के खास्ता हाल को सुधारने के लिए भी मान्य सदस्यों से सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने साफ कहा कि विश्वविद्यालय की आय का आंतरिक स्रोत अत्यंत ही अल्प है। इस कारण अनेक0त आवश्यक कार्य बाधित हो जाते हैं। यहां निःशुल्क शिक्षा के कारण उसकी भरपाई नहीं हो पाती है। संस्कृत के संरक्षण व संवर्धन के लिए छत्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना आवश्यक है और रिक्त पड़े शिक्षकों व अन्य कर्मियों के पदों पर नियुक्ति भी जरूरी है।
इसी क्रम में कुलपति ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की प्रगति को भी रेखांकित करते हुए जानकारी दी कि यहां पांडुलिपियों सम्पादन एवम प्रकाशन का कार्य भी निरन्तर जारी है। इसके अलावा विभिन्न तरह के करीब डेढ़ दर्जन ग्रन्थों का भी प्रकाशन किया गया है। राजभवन के निदेशानुसार शैक्षणिक सत्र 2023-27 से चयन आधारित साख प्रणाली यानी च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) आधारित चार वर्षीय शास्त्री का पाठ्यक्रम प्रारम्भ कर दिया गया है। इसके प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा भी हो चुकी है। कोविड महामारी
के दुष्प्रभाव के कारण जो शैक्षणिक गतिविधि प्रभावित हुई है, उसकी पूर्णतः क्षति पूर्ति अभी तक नही हो पाई है। इसकी भरपाई के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी है। उम्मीद की जा रही है कि 2024 में विश्वविद्यालय की सभी परीक्षाएं अद्यतन हो जाएगी।
खासकर छात्रों को शुभाशीष देते हुए कुलपति प्रो0 पांडेय ने आशा जताई कि उनका अध्ययन स्वयं व समाज के लिये हमेशा हितकारी बना रहे और उनका आचरण प्रशंसनीय व अनुकरणीय हो।

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