प्रदीक नायक : ब्यूरो मधुबनी
मधुबनी : पब्लिक पुस्तकालय राजनगर में पठन – पाठन नहीं होता, यहां अश्लील गानों पर बार बालाओं की ठुमके होते है l बीते 27 मार्च को पुस्तकालय कमिटी की चुनाव हुआ, चुनाव में बड़ा खेल हुआ एक पदस्थ व्यक्ति अध्यक्ष को हटाने के लिए चुनाव का खेल खेला गया था । अध्यक्ष हटा बाकी सब खेलाड़ी यानी कमिटी सदस्यगण पूरानी ही रहे । राजनगर स्थानीय पब्लिक लाइब्रेरी परिसर में व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत पब्लिक लाइब्रेरी समिति की नई कमेटी के गठन को लेकर आम सभा का आयोजन किया गया ।वर्तमान समिति का कार्यकाल ग्यारह साल बेमिसाल, अवधि मार्च 2015 से 27 मार्च 2026 तक के नारे कमेटी द्वारा प्रचलित किया गया l राजनगर पब्लिक लाइब्रेरी के ग्यारह साल तक एक ही कमेटी के लोग पद पर विराजमान रहें । लाइब्रेरी के कर्ताधर्ता अपनी ग्यारह साल के कार्यकाल का ढिढोरा पीटने में किसी तरह की कोई कमी नहीं रखना चाहती ।जबकि चुनाव प्रक्रिया के तहत तीन साल पर चुनाव हो जाना चाहिए ।
यहाँ यह भी बताना आवश्यक हैं कि एक अप्रैल 2016 से बिहार उत्पाद शुल्क नीति के तहत राज्य में शराब बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबन्ध हैं । फिर भी इसके प्रांगण में शादी – विवाह जैसे आयोजन पर खुलेआम शराब का सेवन अश्लील बार बालाओं का नृत्य होते है ।अनेकों बार इस परिसर में शराब की बोतले फेके हुए देखे गए । कई बार एक तरफ बार बालाएं तो दूसरी तरफ मंच के आगे शराब की बीतले पीते लोगों को देखा गया ।
भारत में कानूनन आई पी सी धारा 292 – 294 के तहत अश्लील सामग्री का प्रदर्शन एक दंडनीय अपराध हैं । फिर भी इस परिसर में शादी – विवाह जैसे मौकों पर दुनियां भर के तामझाम दिखाई पड़ते हैं l इसी के तहत शादी – विवाह समारोह के मंच पर देर रात को कम कपड़े पहने अर्धनग्न कुछ युवतियाँ थिरकती हैं । विवाह स्थल पब्लिक लाइब्रेरी के मैदान की बाउंड्री के पास एक स्टेज बना दी जाती हैं, म्यूजिक चलता हैं, और स्टेज पर जो हलचल रहती हैं, ये युवतियाँ उसका रिस्पांस मस्ती भरे अंदाज में थिरक – थिरक कर देती हैं ।किसी भी शादी -विवाह को हिट बनाने के लिए यह तरीका ठीक हैं या नहीं? इसके बारे में खुद सरकार, प्रशासन तथा समाज को तय करना हैं । कई बार तो इस शादी – विवाह के मौकों पर झगड़ा -झंझट और भयंकर मारपीट भी हो चुकी हैं l
भारत में बालश्रम निषेध एवं विनियम,1986 ( संशोधित 2016 ) के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी व्यवसाय में काम पर रखना पूरी तरह प्रतिबन्ध हैं, और 14 से 18 वर्ष के किशोरों के लिए ख़तरनाक काम पर रोक लगाता हैं ।उल्लंघन पर 6 महीने से दो साल तक की जेल और पचास हजार तक का जुर्माना हो सकता हैं । फिर भी इस परिसर में शादी – विवाह के मौकों पर कम उम्र के बच्चों को झूठन उठाते और वर्तन साफ करते कई बार देखा जा सकता हैं ।
यहाँ बताते चले कि 27 मार्च रविवार को राजनगर, पब्लिक लाइब्रेरी के परिसर में सुबह दस बजे से ही नई कमेटी के गठन को लेकर आमसभा में गहमा – गहमी देखा गया । इस दौरान कमेटी के सचिव मौसम गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष प्रवीण धीरासरिया ने विगत ग्यारह वर्षों की उपलब्धियों तथा आय -व्यय का विस्तृत लेखा – जोखा प्रस्तुत किया ।आम सभा में उपस्थित कुछ लोगों ने गहन विचार – विमर्श के बाद कमेटी में अध्यक्ष पद में फेर बदल के बाद पुन : उसी टीम को कार्यभार सौप दिया l या यूँ कहें तो यह कमेटी द्वारा एक सोची समझी रणनीति थी l क्योंकि पब्लिक लाइब्रेरी सोने का अंडा देने वाली एक मुर्गी जो हैं l नई कमेटी में पवन सिंह को अध्यक्ष, सरफ़राज अहमद को उपाध्यक्ष, मौसम गुप्ता को सचिव, मृत्युंजय कुमार कुंदन को संयुक्त सचिव, प्रवीण धीरासरिया को कोषाध्यक्ष एवं श्रवण साह को संयोजक बनाया गया ।
आम सभा में मौजूद कुछ लोगों ने वर्तमान कमेटी द्वारा पिछले ग्यारह साल में किए गए विकास कार्यों की सराहनीय की l कुछ लोगों नें ग्यारह साल में किए गए कार्य को ऑडिट कराने की मांग भी रखी l एक व्यक्ति ने यहाँ तक कह डाला की पब्लिक लाइब्रेरी के पास और भी जमीन उपलब्ध हैं । उस समय किरायेदार द्वारा मकान खाली नहीं किया गया । इसलिए आज यह दुर्दशा हैं ।पब्लिक लाइब्रेरी के भू – दाता का नाम नहीं लिया जाता जबकि दो – चार हजार रूपये देकर ग्रिल देने वाले का नाम अक्षरों में लिया जाता हैं l यह कहाँ का इंसाफ हैं । एक व्यक्ति ने कहाँ कि इसका नाम पब्लिक लाइब्रेरी हैं, लेकिन यहाँ पढ़ने -लिखने तथा शैक्षणिक की कोई व्यवस्था नहीं हैं, समय पर पत्र -पत्रिका भी नहीं रहता । यहाँ समुचित पत्र – पत्रिका उपलब्ध रहें, इसकी व्यवस्था लाइब्रेरी कमेटी को करना चाहिए ।
सभा की अध्यक्षता का कोई औचित्य नहीं रहा । क्योंकि लोग अपने मन से माइक लेकर बोल रहें थे ।मंच संचालन कर्ता मुक दर्शक बने रहें l इस आमसभा में लोगों के बीच अपनत्व की भावना कम और ईर्ष्या, द्वेष आंतरिक मनमुटाव अधिक देखने को मिला । हाँ एक बात साफ हैं कि कुछ लोगों ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद को लेकर समाज के तथा कथित समाज सेवी दूसरे लोगों के नाम का प्रस्ताव रखा । जिस पर आरोप -प्रत्यारोप के साथ – साथ विरोध भी काफ़ी हुई l इसी को कहते हैं समाज सेवी टॉय – टॉय फिस्स

