834 वर्ष प्राचीन श्रीराम-जानकी मठ के पुनर्निर्माण का शुभारंभ
सीतामढ़ी : जगज्जननी माता जानकी के पावन प्राकट्य दिवस जानकी नवमी के अवसर पर शनिवार को सीतामढ़ी जिले के राघोपुर बखरी स्थित 834 वर्ष प्राचीन श्रीराम-जानकी मठ के जीर्णोद्धार, संरक्षण एवं पुनर्निर्माण हेतु भव्य शिलापूजन समारोह वैदिक रीति-विधान, श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। बिहार सरकार के माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने मठ परिसर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत पुनर्निर्माण कार्य की आधारशिला रखी।
यह प्राचीन मठ क्षेत्र के सबसे पुराने एवं पूजनीय धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहे इस ऐतिहासिक स्थल के पुनर्निर्माण से क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन संभावनाओं को नया आयाम मिलने की उम्मीद जगी है।
रामायण रिसर्च काउंसिल का दूरदर्शी तीन चरणीय संकल्प
इस अवसर पर रामायण रिसर्च काउंसिल ने सीतामढ़ी को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने हेतु तीन चरणों में व्यापक कार्ययोजना की घोषणा की। परिषद ने स्पष्ट किया कि उद्देश्य केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि माता जानकी की जन्मभूमि को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, नारी शक्ति एवं वैश्विक चेतना के केंद्र के रूप में विकसित करना है।
प्रथम चरण : श्रीराम-जानकी मठ का भव्य जीर्णोद्धार एवं सांस्कृतिक पुनर्स्थापन
पहले चरण में राघोपुर बखरी स्थित 834 वर्ष प्राचीन श्रीराम-जानकी मठ का पारंपरिक स्वरूप सुरक्षित रखते हुए भव्य जीर्णोद्धार किया जाएगा। प्राचीन स्थापत्य शैली, धार्मिक गरिमा और ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखते हुए मंदिर परिसर का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
मठ परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु यज्ञशाला, सभागार, संत निवास, धर्मशाला, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र एवं आध्यात्मिक शोध केंद्र विकसित किए जाएंगे। यह स्थल भविष्य में मिथिला क्षेत्र की सनातन संस्कृति, रामायण परंपरा और वैदिक अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनेगा।
द्वितीय चरण : प्रतिदिन भूमि-आरती एवं जानकी जन्मभूमि महिमा का विश्वव्यापी प्रसार
दूसरे चरण में सीतामढ़ी की पावन धरती पर प्रतिदिन भूमि-आरती प्रारंभ की जाएगी। यह आरती माता जानकी की जन्मभूमि के प्रति श्रद्धा, समर्पण एवं सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक होगी।
जिस प्रकार काशी में गंगा आरती और अयोध्या में सरयू आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है, उसी प्रकार सीतामढ़ी की भूमि-आरती को भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश के श्रद्धालु सीतामढ़ी की ओर आकर्षित होंगे।
तृतीय चरण : 51 शक्तिपीठों की ज्योति एवं मिट्टी से अखंड शक्तिपीठ की स्थापना
तीसरे चरण में देश के 51 शक्तिपीठों से पवित्र मिट्टी एवं अखंड ज्योति लाकर सीतामढ़ी में एक दिव्य अखंड शक्तिपीठ की स्थापना की जाएगी। यहां माता सीता को भगवती स्वरूप में प्रतिष्ठित किया जाएगा, जिससे सीतामढ़ी शक्ति साधना के महान केंद्र के रूप में स्थापित हो सके।
यह शक्तिपीठ नारी सम्मान, मातृशक्ति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक बनेगा। यहां नियमित यज्ञ, अनुष्ठान, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
नारी शक्ति के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होगा सीतामढ़ी
रामायण रिसर्च काउंसिल ने घोषणा की कि सीतामढ़ी केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि नारी शक्ति, मातृशक्ति और भारतीय संस्कारों के विश्व केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। माता जानकी त्याग, धैर्य, करुणा, मर्यादा, साहस और शक्ति की अद्वितीय प्रतिमूर्ति हैं।
परिषद का उद्देश्य है कि माता सीता के आदर्शों को समाज की महिलाओं, युवतियों एवं नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। इसके लिए महिला जागरण अभियान, सांस्कृतिक प्रशिक्षण, वैदिक शिक्षा, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, नारी नेतृत्व संगोष्ठी एवं मातृशक्ति सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सीतामढ़ी में प्रस्तावित विश्व नारी शक्ति केंद्र के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक चेतना और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी जाएगी।
वैदिक अनुष्ठान ने बांधा समां
पूजन-अनुष्ठान सनातन वैदिक गुरुकुल दीप, मधुबनी (बिहार) के तत्वावधान में सम्पन्न कराया गया। आचार्य डॉ राजनाथ झा के नेतृत्व में आचार्यों एवं शिष्यों द्वारा वेदपाठ, स्वस्तिवाचन, मंगलाचरण एवं वैदिक कर्मकांड सम्पन्न हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।
संत-महात्माओं एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में स्वामी सांदीपेंद्र जी महाराज, विष्णुस्वामी भैय्या जी महाराज, स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरि जी महाराज, स्वामी चंद्रमणि मिश्र जी, स्वामी किशोरीशरण जी महाराज, डॉ. श्रीकृष्ण चामुंडेश्वरा महर्षि जी सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री एस.पी. सिंह बघेल, सांसद अजय भट्ट, चिन्तामणि महाराज सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
आयोजन को सफल बनाने वालों का सम्मान
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कुमार सुशांत जी की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उनके कुशल समन्वय, सतत परिश्रम एवं समर्पित नेतृत्व में कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं गरिमामय ढंग से सम्पन्न हुआ।
साथ ही राजीव सिंह, संजीव सिंह, जय राम विप्लव, पंकज कुमार बबलू, दीपक शर्मा, संतोष सर्राफ, संदीप डालमिया, नागेंद्र राय, राजेश सिंह, महंत रामलीला दास, पीतांबर मिश्र, प्रण शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
पूरे आयोजन के दौरान जय श्रीराम, जय सियाराम एवं जय मां जानकी के जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा। यह समारोह केवल शिलापूजन नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक चेतना, नारी शक्ति जागरण, सनातन परंपरा के संवर्धन और सीतामढ़ी के वैश्विक आध्यात्मिक पुनर्जागरण का ऐतिहासिक प्रारंभ सिद्ध हुआ।